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आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे किसान रूप सिंह नागर बने मिसालउद्यानिकी विभाग की योजना से मिली नई राह

देवास। कृषि को परंपरागत ढर्रे से हटाकर आधुनिक पद्धति से अपनाने वाले किसानों की गिनती लगातार बढ़ रही है। जिले के ग्राम सुल्पाखेड़ा के किसान रूपसिंह नागर इसी श्रेणी के ऐसे प्रेरणादायी उदाहरण बने हैं, जिन्होंने उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर खेती को लाभ का व्यवसाय बना दिया है। श्री नागर ने विभाग की संरक्षित खेती योजना (एमडीएच योजना) के मार्गदर्शन में प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप पद्धति को अपनाया। पहले जहां परंपरागत खेती से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं हो पाता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक से खीरा और अन्य सब्जियों का उत्पादन कर वे लाखों रुपये की बचत और बेहतर आमदनी कर रहे हैं।
आधुनिक पद्धति से मिला लाभ
किसान श्री नागर बताते हैं कि प्लास्टिक मल्चिंग से खेतों में खरपतवार की समस्या लगभग खत्म हो जाती है और उर्वरक का वाष्पीकरण भी कम होता है। इससे फसलों में रोग और कीटों का प्रकोप काफी हद तक नियंत्रित रहता है। ड्रिप सिंचाई पद्धति से पानी की बचत होती है और कम लागत में अधिक उत्पादन मिलता है। वे कहते हैं कि परंपरागत खेती में जहां खर्च अधिक होता था और उत्पादन सीमित मिलता था, वहीं अब आधुनिक पद्धति से फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो गई है और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को आभार
खेती में सफलता के बाद किसान रूपसिंह नागर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं के चलते आज खेती को वास्तव में लाभ का धंधा बनाया जा सकता है।
विभागीय मार्गदर्शन बना सहारा
किसान ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के निरंतर मार्गदर्शन ने उन्हें नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। विभाग की योजनाओं और तकनीकी सहयोग से ही वे आज सफलतापूर्वक खेती कर रहे हैं। ग्राम सुल्पाखेड़ा के किसान श्री रूप सिंह नागर की यह सफलता न केवल अन्य किसानों के लिए मिसाल है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक तकनीक अपनाई जाए तो कृषि को स्थायी और लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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