दूध प्लांट नहीं, ज़हर का कारखाना…! नागूखेड़ी मे केमिकल युक्त पानी से खेत बर्बादी, किसानों की सेहत पर खतरा

देवास. भूमि अधिप्राप्ति-फरोख्त की जमीन में बड़ा फर्जी गोदाम, फर्जी सीमा विहार, नक्शों में पैसा, अमेरिकी रजिस्ट्री, अवैध कब्जा और केमिकल पानी के लिए किसानों की जमीन पर स्वामित्व का भूखंड ग्राम नागाखेड़ी से सामने आया है। आवेदनकर्ता तेजस्वी कुमार शर्मा ने जनसुनवाई में पहुंचकर आवेदन दिया है और आरोप लगाए है की पंकज के पिता संतोष तेजवानी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने दूसरे की जमीन का सीमांकन कर अपने नाम का दावा किया और उसी जमीन पर अवैध टैंक व निर्माण खड़ा कर दिया।
कलेक्टर जनसुनवाई तक रीच, जहां से इसे समय-सीमा में लिया गया, तत्काल जांच के निर्देश जारी किए गए। रजिस्ट्रार एवं जिला जज कार्यालय से प्रकरण अभियोजक कार्यालय को भेजा गया था, लेकिन आरोप है कि नामांकन के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई शून्य है। दाखिल-खारिज में बताया गया कि विशिष्ट खसरा नंबर 167/3/3 पर मिक्सचर द्वारा मिक्स प्लांट का संचालन किया जा रहा है। प्लांट से रीस्टोर वाला केमिकल युक्त बेकार पानी नष्ट हो रहा है, जिसके पीछे अन्य किसानों की जमीनें खाली हो रही हैं, जिससे रीस्टोर वाला केमिकल युक्त बेकार पानी नष्ट हो रहा है। डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल बोर्ड की टीम ने म्यूज़ियम पर फ़्लूच पंचनामा बनाया और प्लांट बंद करने के निर्देश दिए, लेकिन आरोप है कि तीन घंटे बाद ही प्लांट से शुरू कर दिया गया लैब की खुली धज्जियाँ।
जमीन सौदे में करीब 10 लाख रुपये का भी आरोप है। डिल किसी और के नाम, रजिस्ट्री किसी और के नाम और भुगतान किसी तीसरे व्यक्ति का नाम दिखाया गया है। विवाद में लोगों द्वारा 10 लाख रुपये उधार लेने की अपील की कहानी गढ़कर लोगों द्वारा 10 लाख रुपये उधार लेने का आरोप है। दावा है कि इस पूरे फ्रॉड से जुड़े ठोस सबूत मौजूद हैं।
मामले में नामी संपदा का एंगल भी सामने आया है। प्लांट से जुड़े करीब 7 अरे लैंड की रजिस्ट्री गंगा और उनकी मां का नाम है, जबकि 6 अरे लैंड की रजिस्ट्री उनके मामा का नाम बताया गया है। रजिस्ट्री के बाद वह गांव कभी नहीं आया, लेकिन जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। इसके अलावा 0.07 कॉर्नर जमीन पर भी कब्जा कर अवैध उपयोग का आरोप है।
अवैध व्यवसाय और निर्माण को लेकर कंपनी के समसामयिक समाचारों की धारा 133 के तहत आवेदन किया गया है, साथ ही सिविल शिकायत लाइन में शिकायत दर्ज भी की गई है। आरोप है कि जब पटवारी मौसिकी ने फिल्म के निर्देशक पर नप-जोख नहीं किया, पंचनामा नहीं बनाया और मौसिकी पर विवाद खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं, अधिकारियों से बदतमीजी, पंचनामे पर हस्ताक्षर से इंकार और बाद में दाखिल-खारिज में चार को बंधक बनाने की धमकियां देने के आरोप भी लगाए गए हैं। अलग-अलग ऐप्लीकेशन से आवेदन करने के मामले में अनपेक्षित और भ्रम फैलाने की कोशिश का भी दावा किया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब स्केल स्तर से प्वाइंटवार जांच और कार्रवाई के आदेश जारी हो गए, तो फिर कार्रवाई क्यों रुकी है? नागाखेड़ी की यह हाई-प्रोफाइल भूमि और प्रदूषण विवाद न सिर्फ किसानों की जमीन और सेहत से कम है, बल्कि स्वामी शौचालय पर भी सीधा सवाल खड़ा किया गया है। रिव्यू की मांग है कि अवैध कबाड़ा हटे, आमी जमीन जब्त हो और केमिकल जहर वाले प्लांट पर कानून का अमला तुरंत कसा जाए।






