आषाढ़ी एकादशी पर श्री विठ्ठल-रुक्मिणी की पालकी शोभा यात्रा का भव्य आयोजन….महाराष्ट्र समाज देवास द्वारा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई पावन दिंडि

देवास। श्रावण मास के प्रारंभ से पूर्व आने वाली देवशयनी एकादशी अर्थात आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर देवास महाराष्ट्र समाज द्वारा भगवान श्री विठ्ठल-रुक्मिणी की पालकी यात्रा (दिंडि) का अत्यंत भव्य, दिव्य और भक्तिमय आयोजन किया गया। इस मंगलमय दिंडि में सैकड़ों श्रद्धालुजन भाव-विभोर होकर सहभागी बने। शोभायात्रा में सुशोभित पुष्पमालाओं से अलंकृत पालकी में भगवान श्री विठ्ठल और माता रुक्मिणी के विग्रह विराजित रहे, जिनके पावन दर्शन कर श्रद्धालुओं के हृदय आनंदित हो उठे। यात्रा समाज मंदिर से प्रारंभ होकर महात्मा गांधी मार्ग, तहसील चौराहा, मीरा बावड़ी, श्री विठ्ठल मंदिर होते हुए पुन: समाज मंदिर में सम्पन्न हुई।
रास्ते भर गूंजते रहे श्रीनाम और भजनों के स्वर
यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। जय गुरु दत्त मंडल द्वारा यात्रा के पूरे मार्ग में मधुर भजनों और कीर्तन की संगीतमय प्रस्तुति दी गई, जिससे वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। विठोबा रुख्मिणी विठ्ठल के जयघोष से गूंजती दिंडि मानो पंढरपुर की यादें ताजा कर रही थी।
पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुई दिव्य शुरुआत
यात्रा आरंभ से पूर्व समाज मंदिर प्रांगण में समाज अध्यक्ष दीपक कर्पे और न्यास प्रबंधक सदाशिव जोशी द्वारा विधिवत भगवान गणेश एवं भगवान श्री विठ्ठल की आरती और पूजन संपन्न हुआ। तत्पश्चात पालकी यात्रा को मंगलध्वनि और भक्तिमय जयकारों के साथ रवाना किया गया।
पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, संतों की रही पावन उपस्थिति
दिंडि मार्ग पर तहसील चौराहा पर दिलीप सिंह जाधव तथा शनि मंदिर पर स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्री रेणुका माता संस्थान इंदौर के संत प्रवीणनाथ महाराज एवं अनिल बेलापुरकर गुरुजी की पावन उपस्थिति ने आयोजन को और भी पुण्य-गौरवशाली बना दिया।
सुश्राव्य कीर्तन और भक्तिभाव से ओतप्रोत वातावरण
दिंडि सम्पन्न होने के उपरांत समाज मंदिर में कीर्तनकारा संगीता सुपेकर द्वारा भावपूर्ण और सुश्रव्य कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सुना और आत्मिक आनंद प्राप्त किया। कीर्तन में भगवान विठ्ठल की महिमा, भक्ति, और प्रेम की सुंदर झलक रही।
सहयोगियों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
पूरे आयोजन का संयोजन शेखर धोडपकर द्वारा समर्पित भाव से किया गया। साथ ही गिरीश कुलकर्णी, दिव्या गोटी, उज्ज्वला व्यास, वृषाली आपटे, भूषण अत्रे, राजू सुपेकर, पद्माकर फड़निस, संकेत सुपेकर, अतुल बागलीकर, मंदार मुळे, अविनाश जोशी आदि ने तन-मन से सेवाएं प्रदान कीं।
प्रसाद वितरण के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूरे आयोजन में श्रद्धा, सेवा और प्रेम की त्रिवेणी बहती रही।

