चामुंडा माता टेकरी पर गर्भगृह की आरती बंद, हिन्दू संगठनों में रोष, भारत तिब्बत समन्वय संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, प्राचीन परम्परा के अनुसार गर्भगृह से आरती व दर्शन बहाल करने की मांग, नहीं मानी तो आंदोलन की चेतावनी

देवास – प्रसिद्ध चामुंडा माता टेकरी पर गर्भगृह के भीतर होने वाली परम्परागत आरती और दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारत तिब्बत समन्वय संघ एवं विभिन्न हिन्दू संगठनों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए प्राचीन परम्पराओं के अनुसार गर्भगृह से आरती एवं दर्शन पुनः प्रारंभ कराने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि चामुंडा माता मंदिर में प्राचीन काल से गर्भगृह के भीतर नियमित एवं परम्परागत आरती होती रही है, लेकिन बीते एक सप्ताह से यह कहकर कि यह कलेक्टर के आदेश हैं, नियमित आरती करने वाले मंडल को बाहर से आरती करने को कहा जा रहा है और गर्भगृह के भीतर की आरती बंद करवा दी गई है। इस निर्णय से हिन्दू समाज में नाराजगी देखी जा रही है।

संगठन का आरोप है कि कोरोना काल के दौरान अस्थायी रूप से गर्भगृह के भीतर दर्शन बंद किए गए थे, लेकिन 5–6 वर्ष बीत जाने के बाद भी आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में दर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं, पूजारियों द्वारा बाहर से आने वाले कुछ दर्शनार्थियों से शुल्क लेकर गर्भगृह में पूजा एवं दर्शन कराए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नारियल रख लेने तथा पूर्व में लगी नारियल चढ़ाने की मशीनें हटाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। भारत तिब्बत समन्वय संघ और चामुंडा सेवा समिति ने मांग की है कि भक्त मंडल द्वारा की जाने वाली प्राचीन परम्परागत आरती को पुनः गर्भगृह से करने की अनुमति दी जाए और बाहर से आने वाले सभी दर्शनार्थियों को समान रूप से गर्भगृह में दर्शन का अधिकार मिले। साथ ही मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाई जाए, ताकि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने ज्ञापन पर संज्ञान लेकर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो समस्त हिन्दू समाज और धार्मिक संस्थाओं के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





