40-50 गांवों की आस्था का रास्ता बंद! सेंट्रल मालवा एकेडमी पर जमीन से लेकर निर्माण अनुमति तक उठे सवाल, पीरस्थान की वक्फ जमीन पर कब्जे की आशंका, कुन्जमा बाई की भूमि पर एजुकेशन ट्रस्ट का नाम, स्कूल भवन की अनुमति किसने और कितनी जमीन पर दी? भैरव महाराज मंदिर का सार्वजनिक मार्ग खुलवाने कलेक्टर से गुहार

देवास। ग्राम जेतपुरा स्थित सेंट्रल मालवा एकेडमी स्कूल का जमीन और निर्माण से जुड़ा मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। एक तरफ स्कूल परिसर के आसपास की जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाम और कब्जे की प्रविष्टियां सवाल खड़े कर रही हैं, तो दूसरी तरफ स्कूल की विशाल बिल्डिंग की निर्माण अनुमति और उसकी वैधता को लेकर भी ग्रामीणों ने जांच की मांग की है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल 40 से 50 गांवों की आस्था से जुड़े प्राचीन भैरव महाराज मंदिर तक जाने वाले सार्वजनिक रास्ते का है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल की बाउंड्रीवॉल और सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन द्वारा गेट लगाए जाने से मंदिर तक जाने वाला वर्षों पुराना रास्ता बंद हो गया है। इस संबंध में 8 से 10 गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत कर मंदिर का रास्ता तत्काल खुलवाने और पक्का मार्ग बनवाने की मांग की है। अब सवाल यह है कि आखिर सार्वजनिक रास्ते पर अवरोध किस आधार पर खड़ा किया गया और ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन कब मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा?

पीरस्थान की जमीन पर किसका कब्जा? वक्फ भूमि की भी हो जांच
उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में 0.5260 हेक्टेयर भूमि के संबंध में श्री पीरस्थान, भूमि प्रबंधक का उल्लेख दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार यह भूमि वक्फ बोर्ड से संबंधित है। ऐसे में स्कूल परिसर के आसपास इस जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमांकन और उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग और वक्फ बोर्ड के अधिकारी संयुक्त रूप से जमीन का सीमांकन कराएं। यह स्पष्ट किया जाए कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और कहीं स्कूल की बाउंड्रीवॉल अथवा निर्माण इस भूमि की सीमा में तो नहीं पहुंचा है।
कुन्जमा बाई भूमिस्वामी, फिर ट्रस्ट और अनवर खान का नाम कब्जेदार में कैसे?
दूसरे राजस्व रिकॉर्ड में 0.3720 हेक्टेयर भूमि कृषि प्रयोजन के लिए दर्ज है। इसमें कुन्जमा बाई पिता सुखदेव का नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज है, जबकि एजुकेशन ट्रस्ट देवास एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनवर खान का नाम कब्जेदार के रूप में अंकित है। रिकॉर्ड में तहसीलदार के 30 जुलाई 2009 के आदेश के आधार पर प्रविष्टि किए जाने का उल्लेख भी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब राजस्व रिकॉर्ड में भूमिस्वामी के रूप में कुन्जमा बाई का नाम दर्ज है, तो ट्रस्ट और अनवर खान का नाम कब्जेदार के रूप में किस आधार पर दर्ज किया गया? इस प्रविष्टि के पीछे कौन से दस्तावेज और आदेश हैं? क्या इस भूमि का विधिवत हस्तांतरण हुआ है? राजस्व अधिकारियों से भी रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने की स्थिति को लेकर चर्चा की गई है। ऐसे में प्रशासन को संबंधित आदेश, दस्तावेज और वर्तमान कब्जे की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
स्कूल की इतनी बड़ी बिल्डिंग की अनुमति किसने दी? नगर निगम भी जांच के दायरे में
स्कूल की विशाल बिल्डिंग को लेकर भी ग्रामीणों ने कई सवाल उठाए हैं। भवन निर्माण की अनुमति किस विभाग ने जारी की? अनुमति किस अधिकारी ने दी और किस वर्ष जारी हुई? कितने वर्गमीटर या वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण स्वीकृत किया गया? क्या मौके पर बना भवन स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही है? क्या निर्माण के दौरान नगर निगम के सभी नियमों और निर्धारित शर्तों का पालन किया गया? ग्रामीणों ने मांग की है कि नगर निगम से भवन निर्माण की मूल अनुमति, स्वीकृत नक्शा, अनुमति जारी होने की तारीख और स्वीकृत निर्माण क्षेत्रफल का रिकॉर्ड मंगवाया जाए। इसके साथ ही मौके पर भवन का वास्तविक क्षेत्रफल नापा जाए। यदि स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण या नियमों के विपरीत निर्माण पाया जाता है तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
40-50 गांवों के भैरव महाराज मंदिर का रास्ता बंद, श्रद्धालु कैसे पहुंचें दर्शन करने?
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू ग्राम जेतपुरा में छोटी कालीसिंध नदी के किनारे स्थित प्राचीन भैरव महाराज मंदिर का रास्ता है। यह मंदिर धाकड़ समाज और मालवीय समाज सहित आसपास के 40 से 50 गांवों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बताया जाता है। वर्षों से यहां श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं। कलेक्टर को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सेंट्रल मालवा स्कूल की नई बाउंड्रीवॉल का एक हिस्सा शासकीय भूमि पर निर्मित होना प्रतीत होता है। वहीं सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन द्वारा गेट लगाए जाने से मुख्य मार्ग से मंदिर तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध हो गया है। स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं के साथ वाहनों को भी मंदिर तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि यह सार्वजनिक रास्ता वर्षों से उपयोग में था तो इसे बंद करने की अनुमति किसने दी? क्या रास्ते की जमीन का सीमांकन कराया गया? क्या शासकीय भूमि पर निर्माण की शिकायत की जांच हुई? प्रशासन को तत्काल राजस्व, नगर निगम और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम भेजकर मौके की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित, शिक्षा विभाग से जवाब मांगा
इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के करीब 15 दिनों तक बंद रहने की शिकायत भी सामने आई थी। अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने को लेकर चिंता जताई थी। बाद में हस्तक्षेप के बाद सेंट्रल मालवा स्कूल में कक्षाएं संचालित करने की बात सामने आई। ऐसे में शिक्षा विभाग को दोनों संस्थानों की मान्यता, संचालन व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन और भवन संबंधी विवादों का असर आखिर विद्यार्थियों की शिक्षा पर क्यों पड़े?
अब कलेक्टर के सामने कई सवाल, संयुक्त जांच की मांग
ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की जिम्मेदारी है। पीरस्थान की जमीन का वास्तविक स्वामित्व और सीमांकन, कुन्जमा बाई की भूमि पर ट्रस्ट का नाम दर्ज होने का आधार, स्कूल भवन की निर्माण अनुमति और स्वीकृत नक्शे की वैधता, बाउंड्रीवॉल की वास्तविक स्थिति तथा भैरव महाराज मंदिर तक जाने वाले सार्वजनिक रास्ते का राजस्व रिकॉर्ड। ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग, नगर निगम, शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराया जाए। मंदिर तक जाने वाले परंपरागत सार्वजनिक रास्ते को नियमानुसार तत्काल खुलवाया जाए और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पक्का मार्ग बनाया जाए। अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से है कि क्या 40-50 गांवों की आस्था से जुड़े इस मंदिर का रास्ता खुलवाने के लिए मौके पर कार्रवाई होगी या जमीन और निर्माण से जुड़े सवाल फाइलों में ही उलझकर रह जाएंगे? उल्लेखनीय है कि जमीन, कब्जे, निर्माण अनुमति और रास्ता बंद किए जाने से जुड़े सभी सवाल ग्रामीणों द्वारा जनसुनवाई में प्रस्तुत शिकायत एवं उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड पर आधारित हैं। संबंधित स्कूल प्रबंधन, निर्माण एजेंसी और प्रशासन का पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष सामने आना शेष हैं।





