महापौर महिला, लेकिन निगम के जारी प्रेस नोट के फोटो में पतिदेव पर मेहरबान! उदयपुर कचरा प्रबंधन अध्ययन यात्रा में भी महापौर की जगह महापौर पति की तस्वीर प्रमुख, निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल

देवास। देवास नगर निगम चुनाव को करीब 4 वर्ष 2 महीने हो चुके हैं, लेकिन निगम से जारी होने वाले कई प्रेस नोटों और तस्वीरों में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलती है। देवास की महापौर श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल हैं, लेकिन निगम की प्रचार-प्रसार व्यवस्था में कई बार महापौर की जगह उनके पति दुर्गेश अग्रवाल को प्रमुखता मिलती दिखाई देती है।
हालांकि महापौर पति विधायक प्रतिनिधि के रूप में निगम परिषद की बैठकों में बैठते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम की प्रचार व्यवस्था महापौर के बजाय पतिदेव पर ही निर्भर हो गई है..? अक्सर निगम द्वारा जारी प्रेस नोट में महापौर प्रतिनिधि अथवा महापौर पति का नाम लिखकर उनका बखान किया जाता है। चर्चा तो यह भी है कि निगम के कई मलाईदार पदों और व्यवस्थाओं में महापौर की जगह पतिदेव को खुश करने की राजनीति चल रही है। यही कारण है कि निगम की आधिकारिक प्रचार सामग्री में भी महापौर पति को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दिए जाने के आरोप लगते रहते हैं। स्थिति उस समय और हास्यपूर्ण हो जाती है, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में मंच पर से ही महापौर पति दुर्गेश अग्रवाल को गीता नही तो संगीता ही कहकर संबोधित कर जाते हैं। वहीं पिछले दिनों उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी महापौर श्रीमती गीता अग्रवाल की जगह श्रीमती दुर्गेश अग्रवाल कह गए, जो चर्चा का विषय बन गया।
अब सबसे बड़ा सवाल निगम की हालिया उदयपुर अध्ययन यात्रा को लेकर उठ रहा है। देवास नगर निगम परिषद की टीम उदयपुर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था का अध्ययन करने पहुंची, लेकिन निगम द्वारा जारी प्रेस नोट और फोटो में महापौर की जगह महापौर पति की तस्वीर को प्रमुखता दिए जाने पर सवाल खड़े हो गए। इस मामले में परिषद टीम के उदयपुर शहर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था के अध्ययन को लेकर जारी प्रेस नोट और फोटो के संबंध में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी सौरभ त्रिपाठी से जानकारी ली गई। बताया गया कि इस संबंध में जब उनसे पूछा गया कि महापौर उदयपुर गई हैं या नहीं और जारी फोटो में महापौर पति को प्रमुखता क्यों दी गई, तो उन्होंने कहा मुझे नहीं पता, मैं दिखवाता हूं।
अब सवाल यह भी है कि जब कचरा प्रबंधन व्यवस्था से संबंधित निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को ही यह स्पष्ट नहीं है कि महापौर स्वयं अध्ययन यात्रा पर गईं या नहीं, तो आखिर निगम के आधिकारिक प्रेस नोट और तस्वीरों में महापौर पति को इतनी प्रमुखता किसके इशारे पर दी जा रही है?
आखिर सवाल सीधा है—महापौर महिला हैं या महापौर पति…?
नगर निगम की आधिकारिक टीम में महापौर की जगह बार-बार पतिदेव की तस्वीरों और नाम को प्रमुखता देना क्या केवल संयोग है या फिर निगम की व्यवस्था में कोई ऐसा दबाव है, जिसके चलते निर्वाचित महापौर से ज्यादा उनके पति को महत्व दिया जा रहा है? इसके साथ ही एक बड़ा सवाल यह भी है कि महापौर पति किस अधिकार और किस हैसियत से नगर निगम की परिषद टीम के साथ उदयपुर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था के अध्ययन दौरे पर गए। यदि वे निर्वाचित महापौर नहीं हैं, तो निगम की आधिकारिक यात्रा में उनकी भूमिका क्या थी? क्या वे विधायक प्रतिनिधि के रूप में गए थे या किसी अन्य अधिकार के तहत? और यदि ऐसा था तो इसका स्पष्ट उल्लेख निगम के प्रेस नोट में क्यों नहीं किया गया। अब देखना होगा कि महिला महापौर वाले देवास नगर निगम में निगम की कुर्सी और प्रचार की फोटो फ्रेम पॉलिटिक्स आखिर किसके इशारे पर चल रही है—महापौर के या पतिदेव के…?






