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भाजयुमो जिलाध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे कौन, अब संगठन में बढ़ सकती है हलचल, तीन दावेदार मैदान में, जमीनी पकड़ और सक्रियता के दम पर किसकी दावेदारी मजबूत….!

अमित बागलीकर
देवास। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिलाध्यक्ष पद को लेकर देवास में सियासी हलचल तेज हो गई है। संगठन के भीतर चल रही गतिविधियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं और कार्यकर्ताओं के बीच इस पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर जिले में युवाओं की कमान किसे सौंपी जाएगी।
तीन प्रमुख नाम चर्चा में
भाजयुमो जिलाध्यक्ष की दौड़ में तीन नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं अभिषेक गोस्वामी, मोहित जाट और रजत पाल। हालांकि इन तीनों में संगठन की पकड़, अनुभव और कार्यकर्ताओं के समर्थन के आधार पर अभिषेक गोस्वामी की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।
गोस्वामी की मजबूत दावेदारी
अभिषेक गोस्वामी वर्तमान में महाराजा मंडल के अध्यक्ष हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे विधायक गायत्री राजे पवार के करीबी माने जाते हैं और संगठन के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। बूथ स्तर से लेकर बड़े आयोजनों तक उनकी निरंतर सक्रियता और जिम्मेदारी निभाने की कार्यशैली ने उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा बनाया है।
अन्य दावेदारों पर सवाल
मोहित जाट, जो शिप्रा मंडल के अध्यक्ष हैं और हाटपिप्लीया विधानसभा के बांगर क्षेत्र से आते हैं, इसके साथ ही पूर्व सगठन महामंत्री हितानन्द शर्मा के भी ख़ास माने जाते है वही दूसरी और जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पकड़ को लेकर सवाल उठ सकते है। वहीं रजत पाल का नाम संघ कोटे से सामने आया है, लेकिन उनकी दावेदारी को लेकर संगठन के भीतर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती है क्योकि रजत पाल पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के भतीजे कहे जाते है इसके साथ ही प्रदेश नगर निकाय प्रकोष्ठ के सयोजक नरेंद्रसिंह राजपुत के बल पर यह पद पाने की लालसा रखते है वही धन बल के आधार पर यह पद पा लाने की कवायद कर रहे है ऐसी देवास की राजनैतिक गलियारों में चर्चारत है ।
जमीनी कार्यकर्ताओं की उम्मीदें
भाजपा को जमीनी कार्यकर्ताओं की पार्टी माना जाता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा है कि नेतृत्व ऐसे व्यक्ति को मिले, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहा हो और पार्टी की रीति-नीति को बेहतर तरीके से समझता हो। कार्यकर्ताओं की अपेक्षा है कि निर्णय में जमीनी मेहनत को प्राथमिकता दी जाए।
चुनावी दृष्टि से अहम फैसला
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 2028 में आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजयुमो जिलाध्यक्ष का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। एक मजबूत और सक्रिय नेतृत्व पार्टी को संगठनात्मक रूप से और अधिक सशक्त कर सकता है।
नेतृत्व के फैसले पर नजर
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अभिषेक गोस्वामी का नाम सबसे बेहतर माना जा सकता है क्योकि पार्टी के द्वारा किये जाने वाले कार्यक्रमों के साथ सरकार की रिति निती से लोगों के बीच बेहतर तरीके से अवगत कराते है और उनकी सक्रियता, समर्पण और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ उन्हें अन्य दावेदारों से आगे खड़ा करती है। हालाकि अब सभी की निगाहें भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं कि संगठन जमीनी कार्यकर्ता को प्राथमिकता देता है या फिर अन्य समीकरण इस बार भी प्रभावी रहते हैं।

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