देवास कांग्रेस में उबाल—कुर्सी एक, दावेदार कई पर चर्चा सिर्फ एक नाम की….! युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने के संकेत, कार्यकर्ताओं में बढ़ी हलचल

देवास। देवास की सियासत इन दिनों अंदरखाने खूब उबाल मार रही है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक नेताओं की दौड़-धूप जारी है, लेकिन असली मुकाबला अब शहर में ही सिमटता नजर आ रहा है। बात हो रही है कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के शहर अध्यक्ष की, जिसकी घोषणा जल्द होने वाली है—और इसी के साथ दावेदारों के बीच सियासी पारा हाई हो चुका है। नाम तो कई मैदान में हैं, लेकिन चर्चाओं के गलियारों में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वो है धीरज कल्याणे। संगठन के जानकारों की मानें तो इस बार कांग्रेस पुराने चेहरों से ज्यादा जमीनी और एक्टिव युवा पर दांव खेलने के मूड में है—और यहीं से धीरज कल्याणे की एंट्री मजबूत होती दिख रही है।
जमीनी लड़ाका बनाम गुटबाजी की राजनीति
जहां एक तरफ विजय कटेसरिया, जितेंद्रसिंह गौड़ की लॉबी के साथ अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व महापौर जयसिंह ठाकुर के खेमे से संजय रैकवार भी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लेकिन इन दोनों के बीच जो नाम भीड़ से अलग खड़ा नजर आता है, वो है धीरज कल्याणे। धीरज की खासियत सिर्फ दावेदारी नहीं, बल्कि सडक़ से संगठन तक की सक्रियता है। कांग्रेस के हर छोटे-बड़े आंदोलन में उनकी मौजूदगी, विरोध प्रदर्शन में उनकी अग्रणी भूमिका और विपक्ष के रूप में लगातार आक्रामक तेवर—यही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।
सियासी पारा हाई किसके साथ खड़े होंगे शहर कांग्रेस अध्यक्ष..?
देवास में जहां एक ओर भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का तापमान भी चरम पर पहुंच चुका है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम की भूमिका अब इस पूरे समीकरण में बेहद अहम मानी जा रही है। सवाल यही है कि क्या प्रयास गौतम खुलकर धीरज कल्याणे के पक्ष में माहौल बनाएंगे या फिर विजय कटेसरिया और संजय रैकवार के बीच संतुलन साधते नजर आएंगे? संगठन के अंदर यह चर्चा जोरों पर है कि उनकी रणनीति ही अध्यक्ष पद की दिशा तय कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि जिस पर प्रयास का हाथ, उसी की बनेगी बात। ऐसे में उनकी एक चाल पूरी बाजी पलट सकती है। गर्मी के इस मौसम में जहां पारा आसमान छू रहा है, वहीं कांग्रेस SC विभाग के शहर अध्यक्ष पद को लेकर सियासी पारा भी उफान पर है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘गर्म’ मुकाबले में आखिर किसके सिर सजेगा।
युवा चेहरा, लंबी टीम और 2028 का प्लान!
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अब 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में बड़ा बदलाव चाहती है। पार्टी युवा चेहरों को आगे कर सत्ता की राह आसान करने की रणनीति पर काम कर रही है। धीरज कल्याणे इस रणनीति में फिट बैठते नजर आ रहे हैं क्योकि उनके साथ युवाओं की मजबूत टीम, जमीनी स्तर पर पकड़ और लगातार एक्टिव पॉलिटिक्स यही वजह है कि पार्टी के अंदर भी यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर बदलाव करना है, तो चेहरा भी नया और दमदार होना चाहिए।
कांग्रेस का अगला दांव—युवा और अनुभव….?
दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष भी युवा हैं, ऐसे में शहर संगठन में भी युवा को मौका देने की अटकलें तेज हो गई हैं। अगर पार्टी युवा कार्ड खेलती है, तो धीरज कल्याणे का पलड़ा साफ तौर पर भारी दिख रहा है।
अंदरखाने की बात—एक तीर, कई निशाने
राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये भी है कि धीरज को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस एक साथ कई संदेश देना चाहती है युवाओं को संगठन में आगे लाने का संदेश, जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान और गुटबाजी पर लगाम
अब फैसला हाईकमान के पाले में
फिलहाल सभी दावेदार अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं, लेकिन आखिरी फैसला हाईकमान के हाथ में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अनुभव पर भरोसा जताती है या युवा जोश पर दांव खेलती है। लेकिन जिस तरह से माहौल बन रहा है, उससे एक बात साफ है कि अगर इस बार युवा को मौका मिला, तो धीरज कल्याणे सबसे आगे खड़े नजर आ रहे हैं।






