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वंदे मातरम पर सियासी संग्राम….! देवास में गोपनीय बैठक में तलब हुईं पार्षद, बाहर आते ही बोलीं—सब पारिवारिक मामलागीत से इनकार पर कांग्रेस में खलबली, कमेटी के सामने फौजिया-रुबीना की पेशी, सवालों से बचते नजर आए नेता, एक हफ्ते में रिपोर्ट का अल्टीमेटम

देवास। इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम विवाद अब सियासी तूफान बन चुका है। इस बीच देवास में मंगलवार को एक कांग्रेस नेता के स्कूल में हुई गोपनीय बैठक ने मामले को और गरमा दिया। बैठक में विवादित बयान देने वाली पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान को कमेटी के सामने पेश किया गया, जहां उनसे पूरे घटनाक्रम पर जवाब-तलब किया गया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में मध्यप्रदेश कांग्रेस के सह-प्रभारी संजय दत्त और उषा नायडू मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने पार्षदों से वंदे मातरम विवाद को लेकर विस्तार से जवाब मांगा। यह कमेटी प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के निर्देश पर बनाई गई है, जिसे एक हफ्ते में पूरी रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा दिया गया है। हालांकि बैठक पूरी तरह गोपनीय रखी गई, लेकिन बाहर निकलते ही नेताओं का रुख बदला-बदला नजर आया। मीडिया के सवालों से बचते हुए इसे पारिवारिक बैठक बताया गया।
पार्षद फौजिया शेख अलीम ने साफ तौर पर कहा
मैं इस विषय पर कोई कमेंट नहीं करना चाहती, जो कहना था अंदर कह दिया। वहीं दूसरी ओर प्रभारी नेताओं ने भी हर सवाल पर चुप्पी साध ली और हाथ जोडक़र सीधे भोपाल रवाना हो गए।
वंदे मातरम से शुरू हुआ बवाल
यह पूरा विवाद 8 अप्रैल को इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ था। जब कांग्रेस की दो महिला पार्षदों—फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान—ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। दोनों पार्षदों ने इसके पीछे धार्मिक कारण बताते हुए इस्लाम का हवाला दिया। जैसे ही यह बात सामने आई, सदन में भाजपा पार्षदों ने जमकर विरोध किया और माहौल गरमा गया।
सियासत गरम, कार्रवाई की आहट
मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया है। एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्रगान का अपमान बता रही है, तो वहीं कांग्रेस अंदरूनी स्तर पर डैमेज कंट्रोल में जुटी नजर आ रही है। देवास में हुई यह सीक्रेट मीटिंग भी उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जहां पार्टी हाईकमान पूरे विवाद की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है।
चुप्पी क्यों सवाल बरकरार
बैठक के बाद जिस तरह से सभी नेताओं और पार्षदों ने चुप्पी साध ली, उसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं
क्या पार्टी अंदरूनी कार्रवाई की तैयारी में है…?
क्या यह विवाद और बड़ा रूप लेगा?
फिलहाल, सबकी नजर अब उस रिपोर्ट पर टिकी है, जो आने वाले एक हफ्ते में सामने आएगी और तय करेगी कि वंदे मातरम विवाद की सियासत किस दिशा में जाएगी।

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