देवास प्राधिकरण की कुर्सी मजबूत पर दस्तक किसकीसंगठन की सियासत में अनुभवी चेहरा भारी बाकी दावेदारी अब सिर्फ चर्चा तक सीमित…?

देवास। देवास विकास प्राधिकरण की कुर्सी इन दिनों शहर की सबसे हॉट सीट बनी हुई है, लेकिन अंदरखाने जो तस्वीर निकलकर सामने आ रही है, उसमें मुकाबला अब एकतरफा होता दिख रहा है। जहां एक ओर बहादुर मुकाती रघु भदौरिया, राजेश यादव अपने-अपने नेताओं के भरोसे लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिलीप सिंह जाधव (बाबा साहब) ने सियासी बाजी में प्रधिकरण अध्यक्ष की दौड में है। अब तो शहर के हर चौराहे के सज्ञथ साथ सौशल मिडिया पर चर्चा यही है कि मुकाती, भदौरिया और यादव की दावेदारी अब सिर्फ नाम उछालने तक सीमित रह गई है, जबकि असली खेल संगठन और संघ के अंदर चल रहा है और इस खेल के सबसे मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरे हैं बाबा साहब।
मुकाती, भदौरिया और यादव क्यों पड़ सकते है हल्के ….?
बहादुर मुकाती का नाम भले ही संगठन में दिये गए पद तथा खाती समाज के समीकरणों के चलते उछाला गया हो, लेकिन संगठन में उनकी पकड़ उतनी मजबूत नहीं मानी जा रही। वहीं रघु भदौरिया पूरी तरह विधायक खेमे पर निर्भर नजर आते हैं। इसके साथ ही राजेश यादव पूर्व में प्रधिकरण अध्यक्ष रह चुके है लेकिन समय केवल आठ माह का मिलने से एक बार फिर विश्वास पाने के लिये हुए है। ऐसे में तीनों ही दावेदार अपने-अपने सहारे पर टिके हैं, जबकि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में सिर्फ सहारे नहीं, बल्कि स्वीकार्यता और अनुभव मायने रखता है।
बाबा साहब साइलेंट लेकिन सबसे स्ट्रॉन्ग खिलाड़ी
दिलीप सिंह जाधव का नाम भले ही ज्यादा शोर में नहीं रहा, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है। 50 वर्षों का राजनीतिक अनुभव, संगठन के प्रति अटूट निष्ठा और संघ से गहरा जुड़ाव—इन तीनों ने उन्हें बाकी सभी दावेदारों से कई कदम आगे ला खड़ा किया है। सूत्र बताते हैं कि जब भी सेफ और सर्वमान्य चेहरे की बात होती है, तो सबसे पहले नाम बाबा साहब का ही सामने आता है।
पैलेस फैक्टर ने बदली हवा
देवास की राजनीति में आनंद भवन (पैलेस) का प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। बिना सहमति के यहां पत्ता भी नहीं हिलता। ऐसे में जो संकेत मिल रहे हैं, वो साफ इशारा कर रहे हैं कि इस बार भी फैसला उसी दिशा में झुकेगा जहां संतुलन, अनुभव और संगठन की स्वीकृति हो—और इन तीनों कसौटियों पर जाधव पूरी तरह खरे उतरते हैं।
सांसद-विधायक की खींचतान में ‘कॉमन कैंडिडेट’
बीते समय में सांसद और विधायक के बीच की अनबन कई बार सामने आई है। ऐसे में पार्टी किसी नए विवाद को जन्म देने के बजाय एक ऐसे नाम पर दांव लगाना चाहती है, जो दोनों गुटों के लिए नो प्रॉब्लम हो। यही वजह है कि बाबा साहब का नाम सबसे सुरक्षित और मजबूत विकल्प बन चुका है।
अब बस ऐलान बाकी
देवास की सियासत में अब तस्वीर लगभग साफ होती दिख रही है। मुकाती, भदौरिया ओर यादव जहां उम्मीद की लाइन में खड़े हैं, वहीं दिलीप सिंह जाधव लिस्ट में सबसे ऊपर नजर आ रहे हैं। अगर आखिरी वक्त में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि देवास विकास प्राधिकरण की कुर्सी पर इस बार दिलीपसिंह जाधव बाबा साहब का कब्जा तय माना जा रहा है और बाकी दावेदार सिर्फ दर्शक बनकर रह जाएंगे!







