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देवास की सियासत में ‘ग्रहों का खेल’, कुर्सी पर किसका होगा कब्जा ? भोपाल-इंदौर में राजनीति का प्रेशर, देवास में गुटबाजी का असर !

देवास। देवास। प्रदेश की राजनीति इन दिनों प्राधिकरण अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर गर्माई हुई है। सत्ता के गलियारों में नामों की फेहरिस्त घूम रही है, लेकिन कई जिलों में अब तक अध्यक्षों के नामों पर मुहर नहीं लग पाई है। सबसे ज्यादा चर्चा इंदौर, भोपाल, कटनी और देवास को लेकर हो रही है, जहां राजनीतिक समीकरण, गुटबाजी और ऊपर की सहमति के फेर में कुर्सियां होल्ड पर चली गई हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस बार सिर्फ संगठन या वरिष्ठता नहीं, बल्कि ग्रहों की चाल भी नेताओं की कुर्सी तय कर रही है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि कई दावेदार इन दिनों भोपाल से ज्यादा ज्योतिषाचार्यों के संपर्क में दिखाई दे रहे हैं। कोई राहु-केतु शांत करा रहा है तो कोई शनि की ढैय्या हटाने में जुटा है। देवास से लेकर भोपाल तक नेताओं के बंगले पर पंडितों की आवाजाही अचानक बढ़ जाना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
देवास में क्यों अटका मामला ?
अगर देवास विकास प्राधिकरण की बात करें तो यहां मामला सिर्फ नियुक्ति का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व का बन चुका है। शहर की राजनीति में वर्षों से राजघराने और अलग-अलग गुटों का प्रभाव रहा है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अब तक पेलेस खेमे से जुड़ा कोई भी चेहरा देवास विकास प्राधिकरण अध्यक्ष की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाया। यही वजह है कि इस बार भी देवास में नियुक्ति अटकने के पीछे बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी को बड़ा कारण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कई नाम भोपाल तक पहुंचे, लेकिन अंतिम समय में सहमति नहीं बन सकी।
इंदौर-भोपाल में भी फंसी प्रतिष्ठा की लड़ाई
इधर इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में मामला राजनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। यहां कई दिग्गज नेता अपने समर्थकों को कुर्सी दिलाने के लिए लॉबिंग में जुटे हैं। यही कारण है कि प्रदेश के चार बड़े प्राधिकरणों की घोषणा अब तक होल्ड पर है। कटनी और देवास में स्थिति और ज्यादा दिलचस्प मानी जा रही है, क्योंकि यहां स्थानीय नेताओं के बीच अंदरूनी संघर्ष खुलकर सामने नहीं आ रहा, लेकिन पर्दे के पीछे जोड़-तोड़ तेज हो चुकी है।


बहादुर मुकाती का मंगल मजबूत, लेकिन राहु बना रोड़ा !
देवास की राजनीति में बहादुर मुकाती का नाम लंबे समय से संगठन के मजबूत चेहरे के रूप में लिया जाता रहा है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो मुकाती की राजनीतिक कुंडली में मंगल मजबूत स्थिति में माना जा रहा है, जो संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को दर्शाता है। लेकिन चर्चा यह भी है कि राहु की दशा उनके लिए अंतिम समय में अड़चन पैदा कर सकती है। यानी नाम चर्चा में रह सकता है, लेकिन अंतिम सूची तक पहुंचने में ग्रह बाधा बन सकते हैं। हालांकि मुकाती समर्थक दावा कर रहे हैं कि इस बार संगठन स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें कुर्सी तक पहुंचा सकती है।


दिलीपसिंह जाधव शनि की ढैय्या या सत्ता का आशीर्वाद…?
दिलीपसिंह जाधव का नाम भी राजनीतिक गलियारों में तेजी से उभर रहा है। जाधव को पुराने संगठनात्मक अनुभव का फायदा मिलता दिख रहा है। ज्योतिषीय चर्चाओं में कहा जा रहा है कि उन पर शनि की ढैय्या जरूर चल रही है, लेकिन गुरु की कृपा उन्हें अंतिम समय में फायदा दिला सकती है। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगर भोपाल स्तर पर किसी संतुलित चेहरे की तलाश हुई तो जाधव का नाम अचानक मजबूत दावेदार बन सकता है।


रघु भदौरिया सिंह राशि का प्रभाव, लेकिन विरोधी सक्रिय !
रघु भदौरिया को लेकर देवास भाजपा में अलग ही माहौल दिखाई दे रहा है। सिंह राशि से जुड़े होने के कारण समर्थक इसे राजयोग से जोडक़र देख रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी राजनीतिक सक्रियता और कुछ बड़े नेताओं से करीबी उन्हें रेस में बनाए हुए है। लेकिन दूसरी ओर विरोधी गुट भी सक्रिय बताया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भदौरिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती ग्रह नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर की खींचतान बन सकती है।


राजेश यादव चंद्रमा मजबूत, चुपचाप बढ़ा रहे सियासी चाल !
राजेश यादव का नाम भले खुलकर ज्यादा सामने नहीं आ रहा हो, लेकिन अंदरखाने उनकी सक्रियता लगातार चर्चा में बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यादव इस समय लो प्रोफाइल हाई नेटवर्क रणनीति पर काम कर रहे हैं। ज्योतिषीय नजरिए से देखा जाए तो चंद्रमा की मजबूत स्थिति उन्हें जनसंपर्क और राजनीतिक तालमेल में फायदा पहुंचा सकती है। सूत्र बताते हैं कि कुछ बड़े नेताओं की सहमति भी उनके पक्ष में बताई जा रही है।


देवास में ग्रहों से ज्यादा गुटों की लड़ाई !
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि देवास विकास प्राधिकरण की कुर्सी पर इस बार सिर्फ भाग्य या ग्रहों का खेल नहीं, बल्कि भाजपा के अंदर चल रही गुटबाजी सबसे बड़ा फैक्टर साबित होगी। पेलेस खेमे, सांसद समर्थक नेताओं और संगठन के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान ने मामला और उलझा दिया है। यही वजह है कि अब तक नामों पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी है।
20 मई के बाद खुल सकता है राजयोग !
सूत्रों की मानें तो 20 मई के बाद प्रदेश के बाकी बचे प्राधिकरण अध्यक्षों के नामों की घोषणा हो सकती है। देवास में फिलहाल हर दावेदार भोपाल और दिल्ली की तरफ नजरें टिकाए बैठा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि किस नेता की कुंडली में राजयोग बनता है, किसके सितारे चमकते हैं और किसके राजनीतिक सपनों पर ग्रहण लग जाता है।

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